रंग बिरंगी एकता
दिल भी कमाल करता है, जब खाली-खाली होता है, भर आता है
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इंसानियत और अमन
रूहानी
अपनों से, कभी खुद से गुफ्तगू
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रूहानी
तू भी मिलने को बेज़ार नज़र आता है
इस बार दिवाली तू करना आलोकित हर मन
तेरी रज़ा की बिनाह क्या है?
जब तक रहूँ बरकत बन सकूँ, इतना करम कर
आज मेरी भी सालगिरह है
कभी थोड़ा ठहरो...
अपने हिस्से का नूर
और मिल मुझसे, और मुझे दीवाना बना
आजा
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