अपनों से, कभी खुद से गुफ्तगू




  1. बेटू, चलते रहना होगा तुम्हें

  2. मेरे ख्यालों
  3. ज़रा मुस्कुरा दीजिये....

  4. ख़ामोशी

  5. पहली मोहब्बत तो पहली ही होती है

  6. ऐसी अदा-ऐ-गुज़ारिश मुझमें है

  7. बार-बार वही बात, बात को हल्का कर देती है

  8. छोटे-छोटे क़दमों का रिवाज़

  9. हर इनकार ईमान हो जाता है

  10. जज़्बात कुछ यूँ बयां होते हैं...

  11. टूटे रिश्तों के टुकड़े

  12. थोड़ा सा बुद्धू है...

  13. ना खेलो इन हर्फों से लापरवाही से

  14. बड़ी सख्त-दिल यादें हैं, लौट-लौट के आ जाती हैं

  15. अन्दर कहीं अभी भी बच्ची हूँ मैं

  16. कब तक तकते रहेंगे उस हिस्से को जो ख़ाली रह गया

  17. दिल की आवाज़ से ज़्यादा दूर मत जाइएगा

  18. लफ्ज़ बुनने लगती हूँ

  19. उड़ने के लिए पंख कैसे फैलाऊं?

  20. Papa, Happy Father's Day!


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दिल्ली, सर चढ़ा है तेरा जादू

मुसलसल हलकी-हलकी हुड़क है, तेरी सम्त जाती मेरी हर सड़क है, मेरी कायनात का मरकज़ है तू आरज़ू शब-ओ-रोज़ है तेरी, तू माशूका नहीं,...