रविवार, फ़रवरी 17

हमेशा खुश रहना


आज से ठीक एक साल पहले मेरे छोटे भाई अमित की शादी दिल्ली में हुई, और हमारे घर में एक नया जन्म हुआ। हमारे परिवार को एक और बेटी मिली उसकी पत्नी के रूप में। यह रचना उसी के लिए है :-)

अम्मू - चमकी 


छम-छम करती आई चमकी,
सब के दिल को भाई चमकी,
छोटी-छोटी हथेलियों में,
ढेरों खुशियाँ भर लाई चमकी

चमका है अम्मू का जीवन,
चमका है सारा घर आँगन,
जब जब है मुस्काई चमकी

सुन्दरता में गहराई है,
सादगी बालों में पिरो लाई है,
बरकत बन कर आई चमकी

नया घर है, नया परिवार,
बाबुल का घर हर रविवार,
अपने अम्मू पर इठलाई चमकी

ज़रा से कन्धों पर बड़ी ज़िम्मेदारियाँ,
घर सँभालने की हैं तैयारियाँ,
सपने आँखों में भर लाई चमकी

एक पुरानी कहानी दोहराती है,
एहसासों की हर शै गुनगुनाती है
सुहानी यादें फिर ज़िन्दा कर लाई चमकी

मासूमियत रोम-रोम में समेटे है,
समझदारी का आँचल लपेटे है,
सबके दिल को हरने आई चमकी

उसका रहम सदा रहे तुझ पर,
उसका नूर सजा रहे तुझ पर,
रहमतों की बारिशों में भीगने आई चमकी 

सोमवार, फ़रवरी 4

शायर की कहानी

नींद खेले आंखमिचौनी, 
यादें करें मनमानी,
दिल दौड़े दौड़ तूफानी,
सुकून करे आनाकानी,
यही है शायर की कहानी 
शायरी की ज़ुबानी ….

दिल्ली, सर चढ़ा है तेरा जादू

मुसलसल हलकी-हलकी हुड़क है, तेरी सम्त जाती मेरी हर सड़क है, मेरी कायनात का मरकज़ है तू आरज़ू शब-ओ-रोज़ है तेरी, तू माशूका नहीं,...