शुक्रवार, अगस्त 13

जब तक रहूँ बरकत बन सकूँ, इतना करम कर

दौलत और लम्बी उम्र की हसरत नहीं है मुझे,
जब तक रहूँ बरकत बन सकूँ, इतना करम कर,
इस जहाँ में बहुत से चेहरे आंसुओं से भीगे है,
कुछ से तो मुस्कराहट बाँट सकूँ, इतना करम कर
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