प्यास

ताउम्र शक्ल बदल-बदल के मेरे साथ रही तिशनगी,
कभी इसकी तो कभी उसकी प्यासी रही ज़िन्दगी।

जिस से भी मिल गयी, वो नज़र अपनी सी लगी,
हर गुफ़्तगू में दिल लगाती रही ज़िन्दगी। 

एक शख़्स, एक जगह, एक एहसास में क़ैद न रह सकी,
चाहने के नए बहाने  ढूंढती रही ज़िन्दगी। 

वो 'एक' जो दौड़ता है रगों में क़ायनात की,
उस को ज़ीस्त के हर आयाम में पाती रही ज़िन्दगी। 

जहाँ तिश्नगी ही सुकूं-ओ-इत्मीनान हो जाए,
मुसलसल जुस्तुजू में बाँवरी रही ज़िंदगी।  

Sunset pres. Symsonic & Lucid Blue - Desert Rain (Original Mix) - YouTube
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टिप्पणियाँ

बहुत सुन्दर।
अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।
Ankit ने कहा…
bhut hi badiya post likhi hai aapne. Ankit Badigar Ki Traf se Dhanyvad.

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