हिंदी उर्दू के पंख


माना बंद हैं दरवाज़े समय के,
लफ़्ज़ों के झरोखों से उड़ उड़ जाऊं मैं,
रोक सके तो दिखा रोक के, ऐ परदेस मुझे,
हिंदी उर्दू के पंख लगा के उड़ उड़ जाऊं मैं,

बातचीत के बीच उड़ जाऊं,
मन ही मन मुस्का उड़ जाऊं,
सबको चकमा देके उड़ उड़ जाऊं मैं 

तबले की ताल पे उड़ जाऊं,
सितार को ढाल बना के उड़ जाऊं,
बांसूरी की धुन पे, उड़ उड़ जाऊं मैं

गोल-गप्पों की याद में उड़ जाऊं,
इमली का खट्ठा स्वाद लिए उड़ जाऊं,
साथ तड़के के धुएँ के,  उड़ उड़ जाऊं मैं

शेरों से बुने कालीन पे उड़ जाऊं,
यूँ परदेसी ज़मीन से उड़ जाऊं,
ख्यालों की बाँह पकड़े, उड़ उड़ जाऊं मैं

मेहँदी से नक्शा बना के उड़ जाऊं,
चूड़ियों के सितारों में उड़ जाऊं,
भाई की सूरत देख चाँद में, उड़ उड़ जाऊं मैं

सपनों की सिड़ी बना के उड़ जाऊं,
ख्वाहीशों के पीछे-पीछे उड़ जाऊं,
दुआ का आँचल थामे, उड़ उड़ जाऊं मैं

टिप्पणियाँ

गोल-गप्पों की याद में उड़ जाऊं,
इमली का खट्ठा स्वाद लिए उड़ जाऊं,
साथ तड़के के धुएँ के, उड़ उड़ जाऊं मैं

ख्याल तो उम्दा है.
मनोज कुमार ने कहा…
एक बहुत ही अच्छी ख़्वाहिश है। पूरी हो।
उड़ने के लिए तो कल्पना के ही पंख काफी हैं :) अच्छी प्रस्तुति
कुमार संतोष ने कहा…
वाह ....! सुंदर रचना..!

बधाई ....!!


आइये कभी मचान पर
Rakesh Kumar ने कहा…
आपकी सुन्दर उडान ने मन मोह लिया है अंजना जी.अब एक उडान मेरे ब्लॉग 'मनसा वाचा कर्मणा'
पर भी हो जाये.बजरंगी हनुमान के साथ भी कुछ देर उडान का आनंद लीजियेगा.
Bharat Bhushan ने कहा…
ख़्वाहिशों की उड़ान और कल्पनाओं की उड़ान मिल कर रास्ता बनाती हैं. आप भारत का एक दौरा कर डालें. कविता का सौंदर्य रंगबिरंगे पंखों सा आकर्षित करता है.
Kailash Sharma ने कहा…
बहुत खूब!
सच अहि इन कल्पनाओं की उड़ान को पकड़ना आसान नहीं होता ...
शेरों से बुने कालीन पे उड़ जाऊं,
यूँ परदेसी ज़मीन से उड़ जाऊं,
ख्यालों की बाँह पकड़े, उड़ उड़ जाऊं मैं

बेहद खूबसूरत रचना

नीरज
शेरों से बुने कालीन पे उड़ जाऊं,
यूँ परदेसी ज़मीन से उड़ जाऊं,
ख्यालों की बाँह पकड़े, उड़ उड़ जाऊं मैं

बेहद खूबसूरत रचना

नीरज
mridula pradhan ने कहा…
bahut achchi lagi.....
KAVITA ने कहा…
सपनों की सिड़ी बना के उड़ जाऊं,
ख्वाहीशों के पीछे-पीछे उड़ जाऊं,
दुआ का आँचल थामे, उड़ उड़ जाऊं मैं
...bahut badiya sunhali sapneeli prastuti..
kedarnath dham ने कहा…
nice "):)bahut accha likha hai
Bharat Bhushan ने कहा…
आपको और परिवारजनों को नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ.
Rakesh Kumar ने कहा…
ब्लॉग जगत में आपसे परिचय होना
वर्ष २०११ की सुखद उपलब्धि रही.

नववर्ष आपके और आपके परिवार
के लिए नित सुन्दर और सुखद
रहे,यही दुआ और कामना है मेरी.

A very very happy new year to you.
बहुत सुंदर, नए वर्ष हार्दिक शुभकामनाए,...

--"नये साल की खुशी मनाएं"--

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