सोमवार, अप्रैल 13

ग़म के डब्बे

अलग-अलग डब्बों में, 
ग़मों को ढक्कन लगा के बंद कर दिया है। 
और उन डब्बों को दिल के किचन में,
करीने से सजा के रख दिया है।  
हर डब्बे के ग़म का 
ज़ायका ज़रा मुख़्तलिफ़ है।  
कोई ग़म बड़ा तीखा है,
महसूस करते ही 
दिल सी-सी करने लगता है,
लोगों की तीख़ी बातों से बना है ये,
आँखों में आंसूं उतर आते हैं,
उस डब्बे को तो खोलते ही,
बंद करना पड़ता है!
एक डब्बे का ढक्कन
पूरा  बंद ही नहीं होता,
रोज़-रोज़ की 
खिच -खिच से बनता है
ये वाला ग़म।  
इस ग़म की गंध से,
दिल तक़रीबन रोज़ ही 
भरा रहता है,
शायद दिल को उसकी 
आदत हो गयी है। 
एक और डब्बा है,
मीठे दर्द से बना ग़म. 
यह सुनहरी यादों से बना है,
उन लम्हों से बना है जो शायद
कभी लौट के नहीं आएंगे,
यह वाला डब्बा 
अक्सर खोल लिया करती हूँ,
गीली ऑंखें मुस्कुराने लगती हैं,
मेरी जड़ें, मेरी हस्ती को बुलाने लगाती हैं,
मगर फिर ज़िन्दगी आवाज़ देती है,
मुझे वापस आज में बुला लेती है,
और मैं वो डब्बा बंद करके 
वहीँ करीने से सजा देती हूँ।  



8 टिप्‍पणियां:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल बुधवार (15-04-2020) को   "मुस्लिम समाज को सकारात्मक सोच की आवश्यकता"   ( चर्चा अंक-3672)    पर भी होगी। -- 
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है। 
-- 
कोरोना को घर में लॉकडाउन होकर ही हराया जा सकता है इसलिए आप सब लोग अपने और अपनों के लिए घर में ही रहें।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।  
--
सादर...! 
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' 

Anjana Dayal de Prewitt (Gudia) ने कहा…

shukriya, sir

Onkar ने कहा…

बहुत बढ़िया

'एकलव्य' ने कहा…

आदरणीया/आदरणीय आपके द्वारा 'सृजित' रचना ''लोकतंत्र'' संवाद मंच पर( 'लोकतंत्र संवाद' मंच साहित्यिक पुस्तक-पुरस्कार योजना भाग-२ हेतु नामित की गयी है। )

'बुधवार' १५ अप्रैल २०२० को साप्ताहिक 'बुधवारीय' अंक में लिंक की गई है। आमंत्रण में आपको 'लोकतंत्र' संवाद मंच की ओर से शुभकामनाएं और टिप्पणी दोनों समाहित हैं। अतः आप सादर आमंत्रित हैं। धन्यवाद "एकलव्य"

https://loktantrasanvad.blogspot.com/2020/04/blog-post_15.html

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टीपें : अब "लोकतंत्र" संवाद मंच प्रत्येक 'बुधवार, सप्ताहभर की श्रेष्ठ रचनाओं के साथ आप सभी के समक्ष उपस्थित होगा। रचनाओं के लिंक्स सप्ताहभर मुख्य पृष्ठ पर वाचन हेतु उपलब्ध रहेंगे।


आवश्यक सूचना : रचनाएं लिंक करने का उद्देश्य रचनाकार की मौलिकता का हनन करना कदापि नहीं हैं बल्कि उसके ब्लॉग तक साहित्य प्रेमियों को निर्बाध पहुँचाना है ताकि उक्त लेखक और उसकी रचनाधर्मिता से पाठक स्वयं परिचित हो सके, यही हमारा प्रयास है। यह कोई व्यवसायिक कार्य नहीं है बल्कि साहित्य के प्रति हमारा समर्पण है। सादर 'एकलव्य'

Aditya ने कहा…

Bahut sunder

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

सुन्दर सृजन।

Sudha devrani ने कहा…

बहुत ही सुन्दर...।

Anjana Dayal de Prewitt (Gudia) ने कहा…

sabhi ko shukriya!