मंगलवार, जून 30

शायद

एक अजीब सी ख़ामोशी है आज सीने में, या ज़िन्दगी के शोर-ओ-गुल में दिल सुन्न हो गया है शायद,
होठों पे मुस्कराहट तो है, आँखों तक का रास्ता खो गया है शायद...
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दिल्ली, सर चढ़ा है तेरा जादू

मुसलसल हलकी-हलकी हुड़क है, तेरी सम्त जाती मेरी हर सड़क है, मेरी कायनात का मरकज़ है तू आरज़ू शब-ओ-रोज़ है तेरी, तू माशूका नहीं,...