मंगलवार, अगस्त 28

मुझसे नाराज़गी, मुझसे मोहब्बत की वो कमज़ोर लौ है जो बुझ कर भी बुझी नहीं... तेरी नाराज़गी, नाराज़गी नहीं, मेरी उम्मीद है...

 
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दिल्ली, सर चढ़ा है तेरा जादू

मुसलसल हलकी-हलकी हुड़क है, तेरी सम्त जाती मेरी हर सड़क है, मेरी कायनात का मरकज़ है तू आरज़ू शब-ओ-रोज़ है तेरी, तू माशूका नहीं,...