रविवार, जुलाई 15



तू हर जगह है तो हर जगह है बस,
ना किसी क़ायदे  में कैद है ना किसी की जागीर है 

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    उसकी रूह से लिखी गयी थी किताब, इसमें कोई शक़ नहीं, मगर उसे किसी क़ायदे-ओ-क़िताब में बाँधने का, किसी को हक़ नहीं!