रविवार, जुलाई 15



तू हर जगह है तो हर जगह है बस,
ना किसी क़ायदे  में कैद है ना किसी की जागीर है 

3 टिप्‍पणियां:

Rakesh Kumar ने कहा…

जी हाँ अंजना जी.
आपने दुरस्त फरमाया है.
हर कायदा,हर जागीर भी उसी से है.
पर सुना है वह भक्तों के आधीन है.

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

एक उन्मुक्त लहर जैसी है..

Bharat Bhushan ने कहा…

न किसी क़ायदे में क़ैद, न किसी की जागीर
बस वो है. बहुत सुंदर भाव.