रविवार, जुलाई 1

वो उधार की बात करता है,
कैसे उधार दूँ उसे जिसका क़र्ज़ अभी चुकाया नहीं

वो क़र्ज़ जिसमें बखुशी डूबी है ज़िन्दगी,
वो देता गया मुहोब्बत और कभी जताया नहीं




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दिल्ली, सर चढ़ा है तेरा जादू

मुसलसल हलकी-हलकी हुड़क है, तेरी सम्त जाती मेरी हर सड़क है, मेरी कायनात का मरकज़ है तू आरज़ू शब-ओ-रोज़ है तेरी, तू माशूका नहीं,...