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शुक्रवार, अप्रैल 6

कुछ अलफ़ाज़ बिखरा दिए थे यूँ ही, 
क़द्रदानी तो बस करम है आपका... :-)

8 टिप्‍पणियां:

संजय भास्कर ने कहा…

...बहुत उम्दा

Anupama Tripathi ने कहा…

रोज़ रात आती है मुझे सुलाने,

पर हार जाती है ख्यालों के आगे,
sunder bhaav ...
shubhkamnayen ...

M VERMA ने कहा…

बहुत खूब

Bharat Bhushan ने कहा…

अभिव्यक्ति का सुंदर अंदाज़.

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

बहुत खूब..

नीरज गोस्वामी ने कहा…

Kya Baat Hai

Udan Tashtari ने कहा…

वाह!! लाजबाब!!

रचना दीक्षित ने कहा…

क्या बात....
क्या बात....
क्या बात....