गुरुवार, अप्रैल 5

नींद


रोज़ रात आती है मुझे सुलाने,
पर हार जाती है ख्यालों के आगे,
फिर नींद आती है लंगडाती हुई,
जब दिल-ओ-दिमाग थक जाते हैं सवालों के आगे…. 


नींद छिप जाती है जब शायरी मुझ से मिलने आती है, 
कैसे समझाऊं इसे इतनी बेलज्ज़त भी ख्यालों की महफ़िल नहीं होती 

19 टिप्‍पणियां:

M VERMA ने कहा…

नींद और ख्याल दोनों एक साथ कैसे आ सकते हैं

संजय भास्कर ने कहा…

बहुत सुंदर रचना। ऐसी रचनाएं कभी कभी पढने को मिलती हैं

S.N SHUKLA ने कहा…

सुन्दर,सार्थक सृजन, आभार.
कृपया मेरे ब्लॉग" meri kavitayen" की नयी पोस्ट पर भी पधारें, आभारी होऊंगा.

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

ख़यालों के साथ नींद कैसे आए ?

दिगम्बर नासवा ने कहा…

Neend aur khyal dushman Jo hain ki dooje ke ... Bahut khoob ....

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) ने कहा…

बहुत ही बढ़िया

सादर

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) ने कहा…

कल 07/04/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
धन्यवाद!

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

नींद ही ऊर्जा लेकर आती है, हम सबके जीवन में..

mridula pradhan ने कहा…

kya baat hai.....wah.

Sunil Kumar ने कहा…

बहुत ही बढ़िया.....

पंछी ने कहा…

hmm neend aur khayalo ki ladai to hamesha jari rahegi..

Bharat Bhushan ने कहा…

ख़्यालों की लज़्ज़त और ख़्वाबों के बिना तो नींद भी उकता जाएगी. ख़ूब कहा है.

Ratan singh shekhawat ने कहा…

सुन्दर रचना

Saras ने कहा…

रोज़ रात आती है मुझे सुलाने,
पर हार जाती है ख्यालों के आगे,
..वाही तो एक समय होता है ...जो सिर्फ हमारा और हमारे ख्यालों का होता है ....sundar !

Dr.NISHA MAHARANA ने कहा…

ati sundar...

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

खयाल सच सोने भी नहीं देते ... बहुत खूब

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') ने कहा…

नींद के रास्तों में खयालात के स्पीड ब्रेकर....

Onkar ने कहा…

wah, kya baat hai

Udan Tashtari ने कहा…

बेहतरीन रचना....