मंगलवार, मार्च 20



ज़रा सा ख़याल दिल दुखा के गुज़र गया,
दर्द है के बस वहीँ ठहर गया…. 
फिर दर्द को गूंद के बनायी मुस्कराहट,
बड़ा पुराना है, नहीं ये हुनर नया...
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मेरी कलम

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