सोमवार, जुलाई 25

मिलावट के ज़माने में हम पीछे रहें क्यूँ 
उम्मीद मायूसी में मिला ली हमने 


बेईमानी का चलन अपनाया इस अदा से 
मुस्कराहट ग़म में मिला ली हमने 

गुस्से में जो नफरत घोलते हैं, घोला करें,
माफ़ी शिकायत में मिला ली हमने 




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दिल्ली, सर चढ़ा है तेरा जादू

मुसलसल हलकी-हलकी हुड़क है, तेरी सम्त जाती मेरी हर सड़क है, मेरी कायनात का मरकज़ है तू आरज़ू शब-ओ-रोज़ है तेरी, तू माशूका नहीं,...