बुधवार, जुलाई 13

दुआ

इतना ऊँचा उठा मुझे
के तेरे क़दमों में जगह मिल जाए 

13 टिप्‍पणियां:

Dr.Nidhi Tandon ने कहा…

आमीन

Bhushan ने कहा…

फर्क ही नहीं होता हममें गर
तो लज्ज़त कहाँ से आती?
सरगम कैसे सजती,
ये रंगत कहाँ से आती?
चलो, इन्ही फ़र्कों में कहीं,
एक से एहसास ढूंढे

इसी एक अहसास से इंसानियत की शुरूआत होती है. आपकी रचनाओं में मानवीय गुणों का सागर हिलोरें ले रहा है.

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

अनुपम प्रार्थना।

Sunil Kumar ने कहा…

आपकी दुआ कुबूल हो

Deepak Saini ने कहा…

तथास्तु

मनोज कुमार ने कहा…

उत्तम!

Mukesh Kumar Sinha ने कहा…

hamare aur se bhi aameeeen:)

बेनामी ने कहा…

बेहतरीन कहा है ... ।

संजय भास्कर ने कहा…

सच!...बेहतरीन

संजय भास्कर ने कहा…

अस्वस्थता के कारण करीब 20 दिनों से ब्लॉगजगत से दूर था
आप तक बहुत दिनों के बाद आ सका हूँ,

Udan Tashtari ने कहा…

वाह!! क्या दुआ की है...

Rakesh Kumar ने कहा…

'तेरे क़दमों में जगह मिल जाये'
इसका तात्पर्य भगवान की शरण से है.

'ऊँचा' उठाने से मतलब कि हम स्वार्थ के गर्त से निकल सदा सद्विचार,सद्भाव रखते हुए सद्कर्म ही करें.

आपने कुछ ही शब्दों में अध्यात्म का निचोड़ प्रस्तुत कर दिया है.

मैं क्षमाप्रार्थी हूँ कि आपकी इस पोस्ट पर देर से आ पाया हूँ.
सुन्दर प्रस्तुति के लिए बहुत बहुत आभार.

DR. ANWER JAMAL ने कहा…

आमीन या रब्बल आलमीन !

अर्थात
हे सर्वलोकनाथ ! ऐसा ही हो !!

आज आपको अनम बुला रही है 'प्यारी माँ' के पास !!!