मंगलवार, अप्रैल 26

दो जहाँ का फासला


किसी चेहरे में कभी किसी शेर में,
कभी ख्वाब में मिल जाते हो


मगर मिलके भी नहीं मिलते अब तुम,
कहाँ से आते हो, किधर चले जाते हो? 


सोचती हूँ तुम्हें तो उलझती चली जाती हूँ
वो भी कुछ नहीं कहता, तुम भी नहीं बताते हो

दो जहाँ का फासला और सफ़र मुश्किल,
फिर भी रोज़ यादों में चले आते  हो

खुली आँखों की सच्चाई कुछ भी हो ,
बंद आँखों में अक्सर मुस्कुराते हो 

लफ़्ज़ों में बुन लेती हूँ तुम्हारी यादों को,
मुझे शायरी का दुशाला उड़ा जाते हो 
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10 टिप्‍पणियां:

Kanta Dayal ने कहा…

yahi gahrai he.jo din b din khuda ke nazdik le jati he
ham uski hakiquat ko samjhate jate hen
bane raho tum 2 yeshu me bane raho
ruh me gao ruh me jhumo yeshu me bane raho.
jo dali sada phal lati he usko vo chhantata he
pyar khuda jise karta he usko vo dantata he
ruhani phalon se bharne ko yeeshu me bane raho2.

मदन शर्मा ने कहा…

खुली आँखों की सच्चाई कुछ भी हो ,
बंद आँखों में अक्सर मुस्कुराते हो
लफ़्ज़ों में बुन लेती हूँ तुम्हारी यादों को,
मुझे शायरी का दुशाला उड़ा जाते हो
आपके ब्लॉग पर आकर अच्छा लगा.
कोमल अहसासों से परिपूर्ण एक बहुत ही भावभीनी रचना.......
जो मन को गहराई तक छू गयी !
बहुत सुन्दर एवं भावपूर्ण प्रस्तुति !
बधाई एवं शुभकामनायें !

मदन शर्मा ने कहा…

खुली आँखों की सच्चाई कुछ भी हो ,
बंद आँखों में अक्सर मुस्कुराते हो
लफ़्ज़ों में बुन लेती हूँ तुम्हारी यादों को,
मुझे शायरी का दुशाला उड़ा जाते हो
आपके ब्लॉग पर आकर अच्छा लगा.
कोमल अहसासों से परिपूर्ण एक बहुत ही भावभीनी रचना.......
जो मन को गहराई तक छू गयी !
बहुत सुन्दर एवं भावपूर्ण प्रस्तुति !
बधाई एवं शुभकामनायें !

Sunil Kumar ने कहा…

लफ़्ज़ों में बुन लेती हूँ तुम्हारी यादों को,
मुझे शायरी का दुशाला उड़ा जाते हो
यह शेर तो हमें बहुत पसंद आया, कैसे सोंच लिया आपने यह, मुबारक हो .......

रमेश कुमार जैन उर्फ़ "सिरफिरा" ने कहा…

श्रीमान जी, क्या आप हिंदी से प्रेम करते हैं? तब एक बार जरुर आये. मैंने अपने अनुभवों के आधार ""आज सभी हिंदी ब्लॉगर भाई यह शपथ लें"" हिंदी लिपि पर एक पोस्ट लिखी है. मुझे उम्मीद आप अपने सभी दोस्तों के साथ मेरे ब्लॉग www.rksirfiraa.blogspot.com पर टिप्पणी करने एक बार जरुर आयेंगे. ऐसा मेरा विश्वास है.

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Rakesh Kumar ने कहा…

खुली आँखों की सच्चाई कुछ भी हो ,
बंद आँखों में अक्सर मुस्कुराते हों

अंजना जी आपके जज्बात सीधे ही बड़ी सहजता से दिल को छू लेते हैं.आपको ईश्वर ने एक खूबसूरत दिल से नवाजा है.
इस बार मुझे बहुत देर हुई है आपके ब्लॉग पर आने में.इस देरी के लिए क्षमा चाहता हूँ.
आप भी लगता है कहीं व्यस्त हैं.मैं आपका इंतजार कर रहा हूँ अपने ब्लॉग पर.जब भी समय मिले आईयेगा जरूर.

Rakesh Kumar ने कहा…

Anjana ji,
My new post is waiting for you.
I feel very happy to see you on my post.

वन्दना ने कहा…

वाह्……………बहुत सुन्दर भाव संजोये हैं।

DR. ANWER JAMAL ने कहा…

आपने अच्छी सोच को अच्छे ढंग से बयान किया है ।

Udan Tashtari ने कहा…

लफ़्ज़ों में बुन लेती हूँ तुम्हारी यादों को,
मुझे शायरी का दुशाला उड़ा जाते हो


-इतना सुन्दर दुशाला...वाह जी!! बधाई.