सोमवार, अप्रैल 18

अब मज़हबी बातों में दिल नहीं लगता, 
तू दूर हो गया है या करीब आ गया है?
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मेरी कलम

  पहले लिखा करती थी, आजकल नहीं लिखती, पड़ी रहती है थकी-थकी सी, सेहमी सी, यह कलम, आजकल नहीं लिखती।  बहोत बोझ है कन्धों पे इन दिनों,, ...