सोमवार, अप्रैल 18

अब मज़हबी बातों में दिल नहीं लगता, 
तू दूर हो गया है या करीब आ गया है?

14 टिप्‍पणियां:

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

वाह ..दोनों ही हालात में कहीं दिल नहीं लगता ...बहुत खूब

Rakesh Kumar ने कहा…

दिल तो बस उसी के पास रहे,फिर चाहे कोई भी मजहब हो या न हो.

Deepak Saini ने कहा…

bahut khob

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

अब तक बाहर था, अब दिल में समा गया।

रंजन (Ranjan) ने कहा…

vaah!!

संजय भास्कर ने कहा…

"ला-जवाब" जबर्दस्त!!

रश्मि प्रभा... ने कहा…

waah

udaya veer singh ने कहा…

dharm kunthha ya simabadh kshetra nahin hai ,vistrit mansikata ka bodh karane
wala vyapak karyshala hai, samahit hona hoga ,akangi soch ko tyagana hoga .
bhavmayi panktiyan . sadhuvad .

रचना दीक्षित ने कहा…

वाह वाह बहुत सुंदर.

mridula pradhan ने कहा…

kitni pyari baat likh di....

Kailash C Sharma ने कहा…

बहुत खूब! कितना गहन दर्शन चित्रित कर दिया है दो पंक्तियों में..लाज़वाब

Dinesh pareek ने कहा…

अति उत्तम ,अति सुन्दर और ज्ञान वर्धक है आपका ब्लाग
बस कमी यही रह गई की आप का ब्लॉग पे मैं पहले क्यों नहीं आया अपने बहुत सार्धक पोस्ट की है इस के लिए अप्प धन्यवाद् के अधिकारी है
और ह़ा आपसे अनुरोध है की कभी हमारे जेसे ब्लागेर को भी अपने मतों और अपने विचारो से अवगत करवाए और आप मेरे ब्लाग के लिए अपना कीमती वक़त निकले
दिनेश पारीक
http://kuchtumkahokuchmekahu.blogspot.com/

amrendra "amar" ने कहा…

waah bahut khoob,

Udan Tashtari ने कहा…

वाह, क्या बात है!!!