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बुधवार, मार्च 23

दिल

जब दिल दुखी होता है,
तो बड़ा बुरा लगता है,
दिल करता है
दिल को हाथ में लेके सहलाऊँ,
प्यार से कहूँ, 'सब्र कर'
दर्द हल्का हो जाएगा 
फिर धीरे-धीरे थपकाऊँ,
सुला दूँ थोड़ी देर अपनी हथेली पर,
मगर सीने में नहीं सोता 
तो हथेली पे सो पाएगा, पता नहीं,
शायद कोई मरहम हो
जो लगा दूँ इसे, 
बड़ा अँधेरा है इन दिनों इसमें
रौशनी में ले जाऊं इसे, 
ले जाऊं  उसके पास,
रख दूँ उसके पैरों में,
कहूँ, छुले इसे, 
पूछूं, यह दर्द मुझसे तो कम नहीं होता,
तू कर पाएगा?
फिर याद आया उसने कहा था
"मोहब्बत के पेड़ पर
दर्द के फल लगते हैं
मेरे दिल में भी बहुत दर्द है,
इस जहाँ का, 
हर इन्सां का,
जब भी कोई आंसू कहीं गिरता है,
मेरा दिल भी रोता है"
अब सोच रही हूँ,
पहले अपना दिल सहलाऊँ,
या उसका?

16 टिप्‍पणियां:

संजय भास्कर ने कहा…

कोमल अहसासों से परिपूर्ण एक बहुत ही भावभीनी रचना जो मन को गहराई तक छू गयी ! बहुत सुन्दर एवं भावपूर्ण प्रस्तुति ! बधाई एवं शुभकामनायें !

रश्मि प्रभा... ने कहा…

जब भी कोई आंसू कहीं गिरता है,
मेरा दिल भी रोता है"
अब सोच रही हूँ,
पहले अपना दिल सहलाऊँ,
या उसका?
komal ehsaason se utha prashn ... kya jawaab hoga , jab dil hi aisa hai

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

प्रसन्न रह कर ही प्रसन्नता बिखेरी जा सकती है।

Deepak Saini ने कहा…

बहुत गजब की अभिब्यक्ति| धन्यवाद|

वन्दना ने कहा…

अब सोच रही हूँ,
पहले अपना दिल सहलाऊँ,
या उसका?

दूसरे का सहला कर ही खुद के दिल को भी राहत मिलती है।

Rakesh Kumar ने कहा…

वंदनाजी ने जो कहा सच कहा.'दूसरों के दिल को सहला कर खुद के दिल को भी राहत मिलती है.'
दिल तो परमात्मा की नियामत है.दिल ही में तो परमात्मा बसता है.'जब जरा नजरें झुकाई,देखली तस्वीरे यार.' दींन दुखियों की सेवा में आप तो नित ही परमात्मा के दर्शन कर रहीं हैं.

mridula pradhan ने कहा…

bahut achchi lagi.

Bhushan ने कहा…

दिल का माजरा है ही कुछ ऐसा. दूसरों का दिल सहलाते रहो. अपना दिल अपने पास कभी न रखो, किसी को दे दो. शायद यही तरीका है दिल को बचाए रखने का.

Patali-The-Village ने कहा…

प्रसन्न रह कर ही प्रसन्नता बिखेरी जा सकती है। धन्यवाद|

सारा सच ने कहा…

nice

विशाल ने कहा…

अब सोच रही हूँ,
पहले अपना दिल सहलाऊँ,
या उसका?

बहुत खूब

हरीश सिंह ने कहा…

आपके ब्लॉग पर आकर अच्छा लगा. हिंदी लेखन को बढ़ावा देने के लिए आपका आभार. आपका ब्लॉग दिनोदिन उन्नति की ओर अग्रसर हो, आपकी लेखन विधा प्रशंसनीय है. आप हमारे ब्लॉग पर भी अवश्य पधारें, यदि हमारा प्रयास आपको पसंद आये तो "अनुसरण कर्ता" बनकर हमारा उत्साहवर्धन अवश्य करें. साथ ही अपने अमूल्य सुझावों से हमें अवगत भी कराएँ, ताकि इस मंच को हम नयी दिशा दे सकें. धन्यवाद . आपकी प्रतीक्षा में ....
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V!Vs ने कहा…

i think uska dik sahlaayiye.....apne liye to sab jee rhe h.

रचना दीक्षित ने कहा…

कोमल भावनाओ का एहसास. सुंदर कविता.

Chandra Bhushan Mishra 'Ghafil' ने कहा…

क्या एहसास? बहुत खूब

Udan Tashtari ने कहा…

बहुत कोमल अहसास देती रचना.