मंगलवार, मार्च 22

ज़िन्दगी साँस लेती है

पिछले दिनों इतनी तबाही देखी की दिल दहल गया, कुदरत ने अपना तांडव एक बार फिर दिखाया और मौत ज़िन्दगी पे ग़ालिब होती नज़र आई, मगर ज़िन्दगी तो उस की अमानत है, वो है तो ज़िन्दगी है... यानि हमेशा के लिए... 


तबाही के बाद भी ज़िन्दगी साँस लेती है,
ज़ख़्मी ज़मीं को फिर जीने की दुहाई देती है,

नाउम्मीदी की मुट्ठी से उम्मीद को
हौले से आगोश में लेती है,

"तू अगर सच है तो मैं भी एक सच हूँ",
मौत को धीमे से बता देती है 

कभी कोपलों में, कभी किलकारियों में,
हलके से मुस्कुरा देती है 

"चल बस कर अब, माफ़ कर दे"
यूँ ख़फा कुदरत को मना लेती है 

कहती है, "खुदा है तो मैं हूँ,
उसकी हस्ती ही तो मुझको ज़िन्दगी देती है"
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