बुधवार, मार्च 16

शायद आराम आये...

कर दूँ अर्ज़-ऐ-हाल,
शायद आराम आये

बदलूँ सम्त-ऐ-ख़याल,
शायद आराम आये 

छिपा दूँ कहीं किताब-ऐ-सवाल,
शायद आराम आये

भुला दूँ सूरत-ऐ-हाल,
शायद आराम आये 

खो दूँ कहीं दर्द-ऐ-मलाल,
शायद आराम आये 

पा लूँ रहम तेरा ओ बादशाह-ऐ-जमाल,
शायाद आराम आये  


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