बुधवार, मार्च 2

भरोसे के काबिल न मेरी किस्मत है न तेरी फितरत
ज़िन्दगी यूँ भी कट ही जाएगी, सलामत रहे लुफ्त-ए-हसरत 
एक टिप्पणी भेजें

दिल्ली, सर चढ़ा है तेरा जादू

मुसलसल हलकी-हलकी हुड़क है, तेरी सम्त जाती मेरी हर सड़क है, मेरी कायनात का मरकज़ है तू आरज़ू शब-ओ-रोज़ है तेरी, तू माशूका नहीं,...