गुरुवार, जनवरी 20

बेटू, चलते रहना होगा तुम्हें

ये सन्देश मेरे बेटे के लिये है. अभी छोटा सा है, हर बात नहीं समझता. कल मैं रहूँ ना रहूँ, मेरी अपेक्षा इस सन्देश के द्वारा उस तक अवश्य पहुंचेगी....



चलोगे तो गिरोगे भी,
मगर हर चोट का दर्द सहना होगा तुम्हें,

हर बार उठना होगा, 
और चलते रहना होगा तुम्हें,

निराशा और थकावट के पत्थरों पर विजयी होकर,
स्वच्छ नदी सा अविरल बहना होगा तुम्हें 

अश्रु रोके नहीं, प्रवाह में वृद्धि करें सदैव 
हर बूँद को उर्जा में बदलना होगा तुम्हें

रुकोगे नहीं जब तक ना छू लो अपने लक्ष्य को,
हर बाधा से यह कहना होगा तुम्हें 


मेहनत, अनुशासन और सच्चाई तुम्हारे परममित्र हों,
हर मुश्किल का सामना इनके बल पर करना होगा तुम्हें 


कल्पना के पंखों पे उड़ना, सपने देखना, 
मगर उन्हें पूरा करने को धरातल पे चलना होगा तुम्हें 


 पेड़-पौधों, चिड़िया और जानवरों पे दया रखना,
अपने हिस्से की प्रकृति का संरक्षण करना होगा तुम्हें


दूसरों से प्रतिस्पर्धा में समय और ऊर्जा मत गंवाना
अपने आप से ही मुकाबला करना होगा तुम्हें 

जब पथ में आए संसार की कुरूपता,
क्षमा और करूणा से उसे सुंदर बनाना होगा तुम्हें


ना सुनना अगर कोई बहकाए धर्म या जात-पात के नाम पे
सारी मानवता से सांमजस्य रखना होगा तुम्हें 


धनवानों से परिचय ना हो तो कोई बात नहीं,
दीनों के हृदयों में आश्रय पाना होगा तुम्हें 

हँसना-हँसाना, मगर बेपरवाह ना होना,
सुख और चंचलता का अंतर स्मरण रखना होगा तुम्हें,

जीवन की फूलवाड़ी में जब कोई पुष्प भा जाए तुम्हें
प्रेम और संवेदनशीलता से सदा उसका पोषण करना होगा तुम्हें 

तुम्हारा जीवन भर दे वो अपनी सुघंध से
इस तरह उसके जीवन को महकाना होगा तुम्हें 

जब अपना प्रतिबिम्ब देखोगे नन्हें देवदूतों में 
स्वयं आदर्श बन उनका मार्गदर्शन करना होगा तुम्हें 

आयु जब वर्षों से नहीं, पल पल से गिनने लगो, 
प्रतिष्ठा और निष्ठा की लाठी लेकर आगे चलना होगा तुम्हें,

जीवन का कोई  पड़ाव हो या कोई अवस्था 
इश्वर से मिलने को सदैव तैयार रहना होगा तुम्हें 


निराशा और थकावट के पत्थरों पर विजयी होकर,
स्वच्छ नदी सा अविरल बहना होगा तुम्हें


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