सोमवार, दिसंबर 27

ज़रा मुस्कुरा दीजिये....


उदासी, गुस्से और अकड़ से ज़्यादा दोस्ती अच्छी नहीं होती, इनकी पकड़ एक मुस्कराहट से टूट जाती है और फिर माहौल बदलते देर नहीं लगती... मुस्कुराने के कई फायदे हैं, यह आपको ही नहीं सारे आलम को खूबसूरत बना देती है, आपकी रूह को सेहत देती है, दोस्ती को मजबूती देती है, चेहरे को रंगत देती है, नफरत की गिरह तोड़ती है. जब मुस्कराहट दिल से निकलती है तो दिल तक पहुँचती है....

हंस के उदासी हरा दीजिये,
मसले को ना हवा दीजिये
बस, ज़रा मुस्कुरा दीजिये
http://dostishayaris.blogspot.com/2010/07/dil-ka-bazar-mian-dolat-nahi-dekhi-jati.html
    
यूँ खफ़ा क्या रहा कीजिये
क्यूँ सभी को सज़ा दीजिये
जी, ज़रा मुस्कुरा दीजिये 

ये माहौल सजा दीजिये,
सारा आलम जगमगा दीजिये
यूँ ज़रा मुस्कुरा दीजिये

आग-ऐ-रंजिश बुझा दीजिये
गुफ्तुगू इस तरह कीजिये
के ज़रा मुस्कुरा दीजिये

मुश्किलों से यूँ लड़ा कीजिये
शिकन को ना कोई जगह दीजिये
हो सके तो, ज़रा मुस्कुरा दीजिये 

दुश्मनों को भी शामिल किया कीजिये
आप जब भी दुआ कीजिये
खुदा के लिये ज़रा मुस्कुरा दीजिये

माफ़ दिल से किया कीजिये,
जब किसी से गिला कीजिये
फिर ज़रा मुस्कुरा दीजिये

जब लफ़्ज़ों में उलझा कीजिये,
ख़ामोशी में यूँ पनाह लीजिये,
और ज़रा मुस्कुरा दीजिये

दिलों से दिलों को मिला दीजिये,
एक जादू चला दीजिये,
इस तरह मुस्कुरा दीजिये 
एक टिप्पणी भेजें

    उसकी रूह से लिखी गयी थी किताब, इसमें कोई शक़ नहीं, मगर उसे किसी क़ायदे-ओ-क़िताब में बाँधने का, किसी को हक़ नहीं!