बुधवार, अक्तूबर 20

जी करता है

एक ज़िन्दगी में कई जिंदगियां
जीने का जी करता है,
इस ज़िन्दगी में कई जिंदगियां
छूने का जी करता है

हँसते हुओं के साथ हंस लूँ,
रोते हुओं के साथ रो लूँ,
जो कहना चाहते हैं, उनकी सुनु,
जो प्यार भरे बोलों को तरसें, उनसे बोलूं
एक पल में सैंकड़ों पलों को
जगमगाने का जी करता है

खुद से किये वादे निभाने हैं,
हज़ारों आँखों में सपने सजाने हैं,
उम्मीद के आफताब से बादल हटाने हैं,
मिलके ढूँढने खुशियों के खज़ाने हैं,
एक चिराग से कई चिराग
जलाने का जी करता है


एक ज़िन्दगी में कई जिंदगियां 
जीने का जी करता है,
इस ज़िन्दगी में कई जिंदगियां 
छूने का जी करता है 
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    उसकी रूह से लिखी गयी थी किताब, इसमें कोई शक़ नहीं, मगर उसे किसी क़ायदे-ओ-क़िताब में बाँधने का, किसी को हक़ नहीं!