रविवार, सितंबर 5

कुछ लोगों की जिद्द खेल रही हाजारों की जान से

वो जो मजबूर, गरीब, भूके, बीमार और पीड़ित हैं,
वो जो हर पल हालातों से लड़ रहें हैं,
मेरे खुदा आज की रात वो मीठी नींद सो सकें,
मेरे इश्वर आज सुबह उन तक उम्मीद की किरण पहुँच सके

कोई बाड़ से परेशान हैं, तो कहीं ज़लज़ले से बुरे हाल हैं,
कोई खान में फंसे हैं, तो कहीं चक्रवात में बेहाल हैं,
कहीं कुछ लोगों की जिद्द खेल रही हाजारों की जान से
मेरे परवरदिगार बरकतें बन कर बरस जा उन सब पर आज आसमान से
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