रंग बिरंगी एकता
दिल भी कमाल करता है, जब खाली-खाली होता है, भर आता है
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इंसानियत और अमन
रूहानी
अपनों से, कभी खुद से गुफ्तगू
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शनिवार, सितम्बर 4
कब तक तकते रहेंगे उस हिस्से को जो ख़ाली रह गया
कब तक तकते रहेंगे उस हिस्से को जो ख़ाली रह गया,
वक़्त के दरिया में वो राही कब का बह गया,
अरसा हुआ जब रेत का वो खूबसूरत मंज़र डह गया,
आगे बड़ें अब समेट के उस जीवन को जो बिखर के रह गया
1 टिप्पणी:
हास्यफुहार
ने कहा…
बहुत अच्छी प्रस्तुति।
4 सितम्बर 2010 10:50 pm
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बहुत अच्छी प्रस्तुति।
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