शनिवार, अगस्त 14

स्वतंत्रता दिवस पे एक सादा सा सवाल और वही पुराना सन्देश

सादा सा सवाल है, ऊँगली ही उठाते रहेंगे तो,
अपने गिरेबान में कब झाकेंगे?
गलती तो कोई भी निकाल लेता है,
उपाए सोचेंगे तभी तो आगे बढेंगे

एक दुसरे की कमी भुलाके, साथ निभाना होगा,
बचकानी बातें तज कर, बड़प्पन निभाना होगा,
अपने वतन से किया वादा निभाना होगा,
भारत माँ के हर पूत के साथ भाईचारे का रिश्ता निभाना होगा
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    उसकी रूह से लिखी गयी थी किताब, इसमें कोई शक़ नहीं, मगर उसे किसी क़ायदे-ओ-क़िताब में बाँधने का, किसी को हक़ नहीं!