मंगलवार, अगस्त 31

दिल की आवाज़ से ज़्यादा दूर मत जाइएगा

रुकिएगा नहीं, आगे ही चलते जाइएगा, 
जिस राह भी जाएं, दिल की आवाज़ से ज़्यादा दूर मत जाइएगा

                                 दौलत-ओ-शौहरत आसमां के तारों में कहीं होती है,
                                 पर ख़ुशी कहीं दिल के पास छुपी होती है
                                 कितनी भी दूर सफ़र क्यूँ ना करना पड़े, अपने करीब रहिएगा
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    उसकी रूह से लिखी गयी थी किताब, इसमें कोई शक़ नहीं, मगर उसे किसी क़ायदे-ओ-क़िताब में बाँधने का, किसी को हक़ नहीं!