मंगलवार, अगस्त 31

दिल की आवाज़ से ज़्यादा दूर मत जाइएगा

रुकिएगा नहीं, आगे ही चलते जाइएगा, 
जिस राह भी जाएं, दिल की आवाज़ से ज़्यादा दूर मत जाइएगा

                                 दौलत-ओ-शौहरत आसमां के तारों में कहीं होती है,
                                 पर ख़ुशी कहीं दिल के पास छुपी होती है
                                 कितनी भी दूर सफ़र क्यूँ ना करना पड़े, अपने करीब रहिएगा
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दिल्ली, सर चढ़ा है तेरा जादू

मुसलसल हलकी-हलकी हुड़क है, तेरी सम्त जाती मेरी हर सड़क है, मेरी कायनात का मरकज़ है तू आरज़ू शब-ओ-रोज़ है तेरी, तू माशूका नहीं,...