रविवार, अगस्त 29

लफ्ज़ बुनने लगती हूँ

जब जज़्बात उमड़ने लगते हैं,
लफ्ज़ बुनने लगती हूँ

कभी मुस्कराहट की शकल बनाती हूँ,
कभी आसूओं के नमूने बुनने लगती हूँ

कभी कोई रंग हाथ आता है, कभी कोई,
रंगों का ताना-बाना बुनने लगती हूँ

यह जज्बातों का धागा तो ज़िन्दगी के साथ ही ख़त्म होगा,
कहीं फिर उलझ ना जाए,  यही सोच लफ्ज़ बुनने लगती हूँ

13 टिप्‍पणियां:

रंजन ने कहा…

यह जज्बातों का धागा तो ज़िन्दगी के साथ ही ख़त्म होगा,
कहीं उलझ ना जाए, यही सोच के लफ्ज़ बुनने लगती हूँ.......


बेहतरीन....

Chintz ने कहा…

bahut sundar!!!
ma'am thanks for your comment on my latest entry. It was an accident... i was trying to save "kuch jeet likhoon., yaa haar likhoon.." I have deleted the poem from my blog.
would love to see your feedback on my own poems
@ http://poetchintz.blogspot.com

regards,
shailendra

काजल कुमार Kajal Kumar ने कहा…

वाह जी बहुत सुंदर छोटी सी अनुभूति.

Udan Tashtari ने कहा…

बहुत बेहतरीन रचना.

Parul ने कहा…

bahut sundar!

सत्यप्रकाश पाण्डेय ने कहा…

sundar prastuti,
यहाँ भी पधारें :-
अकेला कलम
Satya`s Blog

Akshita (Pakhi) ने कहा…

बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति..सुंदर भाव.बधाई.

___________________
'पाखी की दुनिया' में अब सी-प्लेन में घूमने की तैयारी...

Anjana (Gudia) ने कहा…

धन्यवाद :-)

Akhtar Khan Akela ने कहा…

bunne kaa kaam aap jari rkhen pliz is bunne men hi zrur aek bhut bdha saahity ujaagr hoga jiski suruaat to saamne hi he. akhtar khan akela kota rajsthan

ओशो रजनीश ने कहा…

अच्छी कविता लिखी है आपने .......... आभार

कुछ लिखा है, शायद आपको पसंद आये --
(क्या आप को पता है की आपका अगला जन्म कहा होगा ?)
http://oshotheone.blogspot.com

mai... ratnakar ने कहा…

यह जज्बातों का धागा तो ज़िन्दगी के साथ ही ख़त्म होगा,
कहीं फिर उलझ ना जाए, यही सोच लफ्ज़ बुनने लगती हूँ


bunate rahie... warna itanee achchhee aur panktiyan phir kaise padhane miltee rahengee????

Mukesh Kumar Sinha ने कहा…

जब जज़्बात उमड़ने लगते हैं,
लफ्ज़ बुनने लगती हूँ

aisa hi sayad har Kaviyon ke saath hota hai..:)
sundar prastuti......isliye follow karna para..aage se barabar aaunga..:)

रश्मि प्रभा... ने कहा…

bahut hi majboot bunawat hai , lafzon ki kasawat hai .... chahiye vatvriksh ke liye ...parichay aur tasweer ke saath ---- rasprabha@gmail.com per