सोमवार, अगस्त 16

एक ज़िद्दी ख़्वाब

एक ज़िद्दी ख़्वाब बार-बार आखों में सज जाता है,
के जश-ए-अमन में दुनिया मस्त है,
दोस्ती की मस्ती है, मोहब्बत का बोलबाला है,
नफरत, भ्रष्टाचार और मारामारी पस्त है.
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दिल्ली, सर चढ़ा है तेरा जादू

मुसलसल हलकी-हलकी हुड़क है, तेरी सम्त जाती मेरी हर सड़क है, मेरी कायनात का मरकज़ है तू आरज़ू शब-ओ-रोज़ है तेरी, तू माशूका नहीं,...