सोमवार, अगस्त 16

एक ज़िद्दी ख़्वाब

एक ज़िद्दी ख़्वाब बार-बार आखों में सज जाता है,
के जश-ए-अमन में दुनिया मस्त है,
दोस्ती की मस्ती है, मोहब्बत का बोलबाला है,
नफरत, भ्रष्टाचार और मारामारी पस्त है.
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    उसकी रूह से लिखी गयी थी किताब, इसमें कोई शक़ नहीं, मगर उसे किसी क़ायदे-ओ-क़िताब में बाँधने का, किसी को हक़ नहीं!