गुरुवार, अगस्त 12

नाम सुन कर, मज़हब जानने की कोशिश क्यों किया करते हैं?

नाम सुन कर, मज़हब जानने की कोशिश क्यों किया करते हैं?
दिल परख़ कर, इंसान को जानना ज़रूरी है,
लिफ़ाफे में नहीं, ख़त में पैगाम हुआ करता है,
किताब-ए-दिल के मजमून को समझना ज़रूरी है, 

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दिल्ली, सर चढ़ा है तेरा जादू

मुसलसल हलकी-हलकी हुड़क है, तेरी सम्त जाती मेरी हर सड़क है, मेरी कायनात का मरकज़ है तू आरज़ू शब-ओ-रोज़ है तेरी, तू माशूका नहीं,...