गुरुवार, अगस्त 12

नाम सुन कर, मज़हब जानने की कोशिश क्यों किया करते हैं?

नाम सुन कर, मज़हब जानने की कोशिश क्यों किया करते हैं?
दिल परख़ कर, इंसान को जानना ज़रूरी है,
लिफ़ाफे में नहीं, ख़त में पैगाम हुआ करता है,
किताब-ए-दिल के मजमून को समझना ज़रूरी है, 

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    उसकी रूह से लिखी गयी थी किताब, इसमें कोई शक़ नहीं, मगर उसे किसी क़ायदे-ओ-क़िताब में बाँधने का, किसी को हक़ नहीं!