शनिवार, जुलाई 31

अमन बसता है उसकी पनाहों में


खुदा और उसके सच को बांध सको तो बांध लो,
गिरजों में, मंदिरों में, मज़्जिदों में या और इबादत गाहों में,
गर कभी उसे पा जाओ, तो जानोगे,
वो रहता नहीं इमारतों में या उनकी बनाई सरहदों में.


सुनी सुनाई बातों पे झगड़ा ना करो,
महसूस करो उसको, फिर जानोगे,
मोहब्बत बसती है उसकी हाज़री में,
अमन बसता है उसकी पनाहों में.

- गुडिया 
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