मंगलवार, मई 18

मेरे ख्यालों

मेरे ख्यालों, मिजाज़ बदलो अपना,
अब रुख मोड़ लो अपना,
उम्मीद है तुम्हारी हमसफ़र,
खौफ से रिश्ता थोड़ लो अपना

मेरे ख्यालों, बंद कोठरी की आदत छोड़ दो,
खुली वादिओं में घूमने की आदत डालो,
झिज्को नहीं हदों से तुम,
तस्सवुर के पंख लगा कर आसमान में उड़ने की आदत डालो

मेरे ख्यालों, मुश्किलों में मौका ढूँढो,
अँधेरे में रास्ता ढूँढो,
मंजिल तो कभी न कभी मिल ही जाएगी,
गर हर कदम पे उसके निशाँ ढूँढो
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दिल्ली, सर चढ़ा है तेरा जादू

मुसलसल हलकी-हलकी हुड़क है, तेरी सम्त जाती मेरी हर सड़क है, मेरी कायनात का मरकज़ है तू आरज़ू शब-ओ-रोज़ है तेरी, तू माशूका नहीं,...